कांग्रेस में राहुल के बाद प्रियंका गांधी आई लेकिन भगदड़ नहीं रोक पाई

कांग्रेस में राहुल के बाद प्रियंका गांधी आई लेकिन भगदड़ नहीं रोक पाई

2019 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मोर्चा संभाल रखा है, तो वहीं कांग्रेस के खेमे में मानो भगदड़ सी मची हुई है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक कांग्रेस पार्टी के नेता व कार्यकर्ता कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम रहे है। अब तक 6 राज्यों में 17 बड़े नेता कांग्रेस का साथ छोड़कर भगवा ब्रिगेड में शामिल हो गए हैं।

अटकलें हैं कि आने वाले दिनों में कई पुराने कांग्रेसी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। एक तरफ जहां पार्टी आलाकमान चुनाव जीतने के लिए महागठबंधन संग जोड़-तोड़ में लगी है, वहीं उसके अनुभवी नेता टूट-टूटकर अलग हो रहे हैं। एक के बाद एक कांग्रेस नेताओं के जाने राहुल गांधी के सामने ये संकट खड़ा हो गया है कि वे सरकार के साथ चुनावी लड़ाई लड़ें या फिर अपनों को टूटने से रोके।

कांग्रेस छोड़ने वालों में सबसे बड़ा नाम हैं टॉम वडक्कन का है जिन्होनें 14 अप्रैल को कांग्रेस छोड़ बीजेपी की सदस्यता ली। टॉम वडक्कन UPA अध्यक्ष सोनिया गांधी के क़रीबी सहयोगी हुआ करते थे। बीजेपी इस समय दक्षिण भारत में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों में लगी है। माना जा रहा है कि टॉम वडक्कन इस समय केरल में उसका जनाधार बढ़ाने के लिए ख़ासे काम आ सकते हैं।

हरियाणा में बीजेपी ने कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद अरविंद शर्मा को तोड़कर अपने पाले में शामिल कर लिया है। वहीं असम में कांग्रेस के पूर्व मंत्री रहे गौतम रॉय, कांग्रेस के पूर्व सांसद किरिप चालिहा, सिलचर से कांग्रेस विधायक रहे गौतम रॉय ने बीजेपी का दमान थाम लिया। इसी तरह महाराष्ट्र में भी कांग्रेस को झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल ने भी 12 मार्च को भाजपा में शामिल हो गए। राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र विधानसबा में विपक्ष के नेता भी हैं।

गुजरात की बात करें तो पिछले तीन महीने में 5 कांग्रेसी विधायकों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। एक तरफ कांग्रेस गुजरात में हार्दिक पटेल को साथ लाकर लोकसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के प्रयास में जुटी है, तो वहीं दूसरी तरफ पार्टी के नेता लगातार उनका साथ छोड़ रहे हैं। हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस के नेता डॉ. उमेश जाधव बीजेपी में शामिल हुए हैं। पिछले 10 दिनों में तेलंगाना के 19 कांग्रेस विधायकों में से चार TRS में जा चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अपना जनाधार बचाने के लिए पहले ही जूझ रही है। और बीजेपी यहां टीएमसी के मुकाबले में मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी में लक्ष्य 22 सीट जीतने का है। अपने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजेपी रणनीतिकारों ने ममता बनर्जी के खेमे में तो सेंधमारी की ही है साथ ही कांग्रेस के उन नेताओं को भी अपनी पार्टी में शामिल किया है जिन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति का अनुभव है और वहां की समझ भी। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कई नेता अबतक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

इतने नेताओं के जाने के बाद सवाल ये उठने लगा है कि कांग्रेस में प्रियंका गांधी आई लेकिन भगदड़ वो भी नहीं रोक पाई। इस भागम भाग के पीछे दो वजहें हैं हो सकती हैं। या तो कांग्रेस नेताओं को लगने लगा है कि इस बार भी कांग्रेस से चुनाव लड़कर कोई फायदा नहीं होने वाला या फिर ये कि इन नेताओं को राहुल गांधी के नेतृत्व में उतनी तरजीह नहीं मिल रही थी जितनी सोनिया गांधी के नेतृत्व में थी। क्योकिं जाने वालों में कई ऐसे नेता शामिल हैं जो सोनिया गांधी की टीम का हिस्सा रहे थे।

 

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