हाफ शर्ट, सैंडल और स्कूटर की सवारी…. वाकई बिरले थे मनोहर पर्रिकर

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का 63 वर्ष की आयु में रविवार को निधन हो गया। पर्रिकर पिछले एक साल से अग्नाशय के कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज अमरीका के साथ-साथ नई दिल्ली स्थित एम्स और मुंबई के एक निजी अस्पताल में चला लेकिन आखिर में वो जिंदगी की जंग हार गए।

पर्रिकर का जन्म गोवा की राजधानी पणजी से क़रीब 13 किलोमीटर दूर मापुसा में 13 दिसंबर 1955 को हुआ था। उन्होंने मडगांव के लोयला हाई स्कूल से पढ़ाई की और आईआईटी मुंबई से 1978 में मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वो किसी भी भारतीय राज्य के विधायक बनने वाले पहले आईआईटी स्नातक थे।

मनोहर पर्रिकर वो पहले शख्स थे, जिन्होंने नरेंद्र मोदी को पीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किया था। पर्रिकर मोदी सरकार में भारत के रक्षा मंत्री रहे। रक्षा मंत्री के कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने इस्तीफ़ा दिया था और चौथी बार 14 मार्च 2017 को गोवा के मुख्यमंत्री बने। इससे पहले वो 2000 से 2002, 2002 से 2005 और 2012 से 2014 में भी गोवा के मुख्यमंत्री रहे।

अपनी सादगी और ईमानदारी से दिलों में स्थान बनाने वाले मनोहर पर्रिकर गोवा के मुख्यमंत्री थे मगर उनका दिल आलीशान सरकारी बंगले की वजाय छोटे से घर में बसता था। महँगी और लंबी गाड़ियों से नहीं सामान्य कार और स्कूटर से ज्यादा चलते थे। पहनावा और खान-पान बहुत सादा। हाफ शर्ट और सैंडिल में तो कई बार विदेश तक घूम आते थे।

यहाँ तक कि बेटे की शादी में भी शूट-बूट धारण नहीं किया। उसी हाफ शर्ट में घर की शादियाँ भी अटेंड करते थे। सड़क किनारे चाय पीते तो लोकल ढ़ाबे पर आम जन संग रोटी भी खा लेते थे। लाइन में भी खड़े नज़र आते थे। कई बार प्रोटोकॉल छोड़ साथियों के घर ही भोजन करने चले जाते थे। हवाई सफ़र भी बिजनेस नहीं इकोनमी क्लास में करते थे।

गोवा का सीएम रहते एक बार पर्रिकर साहब को जयपुर जाना पड़ गया। अफसर उन्हें लेने पहुँचे तो पता चला कि वह ख़ुद ही कंधे पर बैग लटकाए टैक्सी से होटल के लिए निकल चुके थे। ख़ुद यह वाक़या सुषमा स्वराज एक कार्यक्रम में बता चुकीं हैं। 39 साल की उम्र में देश के पहले आइआइटियन विधायक और बाद में मुख्यमंत्री भी हुए। जिस ढंग से नाक में नली लगाकर भी चार बार के सीएम पर्रिकर साहब ज़िंदगी और मौत से लड़ते हुए भी गोवा की जनता की सेवा में जुटे रहे, उनकी जिजीविषा प्रेरणादायक रही।

पार्रिकर साहब शानदार पिता भी रहे। 2002 में पहली बार जब सीएम बने, उससे पहले पत्नी का कैंसर से निधन हो चुका था। मगर उन्होंने पिता का दायित्व बख़ूबी निभाते हुए बेटे-बेटी का पालन पोषण किया। दुख होता है यह देखकर कि भगवान सबसे ज्यादा कष्ट ऐसे शानदार इंसानों को ही क्यों देते हैं। पति-पत्नी दोनों का निधन कैंसर से हुआ। सोचिए, पर्रिकर साहब, अपनी मुस्कुराहटों के पीछे कितना भारी दर्द छुपाए घूमते रहे होंगे।

 

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