Akhilesh’s Uncle Shivpal says, will not field any candidate against nephew

जानियें, कौन सी लोकसभा सीटों पर रिश्ते बनें ‘चुनावी दंगल’

सियासत है ही ऐसी चीज, जी हां जहां एक ओर राजनैतिक दल एक दूसरे से मुकाबला कर रहे है वहीं इस चुनावी दंगल में कई जगह रिश्तों का मुकाबला हो रहा है। एक ही परिवार के लोग कहीं अलग-अलग पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं तो कहीं विरोधी विचारधारा की पार्टी के अहम पदों पर हैं और अपनी पार्टी को समर्थन करने के साथ ही अपने परिवार के सदस्य की पार्टी पर हमलावर हो रहे हैं। इस बार कई ऐसे सदस्य चुनावी मैदान में हैं। जिनका एक भाई विधायक है तो दूसरा सांसद बनने के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसी तरह सांसद पिता के पुत्र भी संसद में जाने के लिए चुनावी ताल ठोक रहे हैं। आज ऐसे ही कुछ रिश्तों से हम आपकों कराएंगे रूबरू…..

शिवपाल (चाचा) vs अखिलेश (भतीजा)

यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह के भाई और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने एसपी से अलग होकर अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई है और 31 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी किया है। वह खुद फिरोजाबाद सीट से लड़ रहे हैं, जहां समाजवादी पार्टी ने रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव को टिकट दिया है।

यशवंत (पिता) vs जयंत सिन्हा (पुत्र)

अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। खास बात ये है कि उनके बेटे जयंत सिन्हा नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं। जयंत एक बार फिर झारखंड की हजारीबाग सीट से बीजेपी उम्मीदवार हैं। 2014 में भी वह यहीं से चुनाव जीते थे। इसी सीट से यशवंत भी चुनाव लड़ते रहे हैं। इसी साल जनवरी में यशवंत सिन्हा ने राष्ट्रमंच का गठन किया।

कृष्णा (मां) vs अनुप्रिया पटेल (बेटी)

‘अपना दल’ पार्टी में भी रिश्तों का मुकाबला दिख रहा है। अनुप्रिया पटेल वाले ‘अपना दल’ ने बीजेपी के साथ गठबंधन का ऐलान किया है और अनुप्रिया पटेल खुद मिर्जापुर सीट से लड़ेंगी। वहीं, अनुप्रिया की मां कृष्णा पटेल का अपना अलग ‘अपना दल’ है। कृष्णा पटेल अपना दल (कृष्णा गुट) और कांग्रेस की संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर यूपी की गोंडा सीट से चुनाव के मैदान में हैं।

जयवीर (पिता) vs अरविंद सिंह चौहान (पुत्र)

यूपी की गौतमबुद्ध नगर सीट से अरविंद सिंह चौहान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं वह कुछ वक्त पहले तक बीएसपी में थे। अरविंद के पिता जयवीर सिंह बीजेपी के नेता हैं हालांकि वह भी पहले बीएसपी में रह चुके हैं। जब जयवीर बीजेपी में आए तो यह कयास लगाए जा रहे थे कि उनके बेटे अरविंद भी बीजेपी में शामिल होंगे, लेकिन जब उनका नाम कांग्रेस की लिस्ट में आया तो इसने कई लोगों को चौंका दिया।

सुनीता (बहन) vs अमीता (बहन)

ओडिशा में दो बहनें अलग-अलग पार्टी से उम्मीदवार हैं। ये ओडिशा के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता हेमानंद विश्वाल की बेटियां हैं। सुनीता कांग्रेस छोड़ बीजेडी में शामिल हुईं और अब सुंदरगढ़ लोकसभा सीट से बीजेडी की उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने सुनीता की छोटी बहन अमीता को विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है।

राधाकृष्ण (पिता) vs सुजय विखे (पुत्र)

महाराष्ट्र में कांग्रेस के सीनियर नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय विखे अहमदनगर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हैं। सुजय ने पिछले महीने ही बीजेपी जॉइन की। वह पहले कांग्रेस के टिकट पर इस सीट पर लड़ना चाह रहे थे लेकिन शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने अहमदनगर सीट कांग्रेस को देने से इनकार कर दिया। राज्य में कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। जिसके बाद सुजय ने बीजेपी का दामन थाम लिया।

भुवन चन्द्र खंडूरी (पिता) vs मनीष खंडूरी (पुत्र)

उत्तराखंड के सीएम रहे और बीजेपी नेता बी.सी.खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी भी कांग्रेस के टिकट पर पौड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। खंडूरी बीजेपी में ही बने हुए हैं और उन्होंने बेटे के कांग्रेस जॉइन करने पर कहा कि बेटे को अपने फैसले लेने का अधिकार है। जरूरी नहीं कि मैं जिस पार्टी में हूं उसी में बेटा भी आए।

भाई-भाई लेकिन राहें अलग-अलग

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर-डोडा सीट से उम्मीदवार हैं। जितेंद्र सिंह के छोटे भाई और उद्योगपति देवेंद्र सिंह राणा नैशनल कॉन्फ्रेंस के जम्मू संभाग के अध्यक्ष हैं। नैशनल कॉन्फ्रेंस का इस सीट पर कांग्रेस को समर्थन है। यहां भाई, भाई के खिलाफ वोट मांग रहे हैं।

इसी सीट पर कांग्रेस नेता डॉ. कर्ण सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। जबकि विक्रमादित्य के छोटे भाई अजातशत्रु बीजेपी नेता हैं और अपने भाई के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। कर्ण सिंह अपने बेटे विक्रमादित्य का प्रचार कर रहे हैं तो अजातशत्रु बीजेपी उम्मीदवार जितेंद्र सिंह का।

हरियाणा के चौटाला परिवार में भी इस चुनाव में रिश्तों का मुकाबला दिखाई देगा। ओमप्रकाश चौटाला के दोनों बेटों की राहें जुदा हो गई हैं। अब अभय चौटाला और अजय चौटाला अलग हो गए हैं। इनेलो से अलग होकर अजय चौटाला के दोनों बेटों दुष्यंत सिंह और दिग्विजय सिंह ने जननायक जनता पार्टी का गठन किया है। दोनों भाई एक दूसरे के खिलाफ चुनावी दंगल में दिखेंगे।

वहीं बिहार में कांग्रेस से राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह के पुत्र पूर्वी चंपारण से रालोसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। अगर वह चुनाव जीतते हैं तो पिता-पुत्र दोनों संसद के सदस्य होंगे।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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