loksabha election mulayam and mayawati share stage mainpuri rally

24 साल बाद एक मंच पर नजर आए मुलायम और मायावती, जमकर की एक-दूसरे की तारीफ

समय बड़ा ही बलवान होता है इसकी बानगी आज मैनपुरी में देखने को मिली। जहां बीएसपी सुप्रीमों मायावती और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक मंच पर दिखे। धुर विरोधी माने जाने वाले मुलायम सिंह यादव के साथ मायावती एक मंच पर एक साथ और मायावती जनता से मुलायम सिंह को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए वोट की अपील करती दिखी।

मायावती ने नरेंद्र मोदी को नकली प‍िछड़े वर्ग का बताकर ओबीसी की राजनीति को हवा दे दी है। बसपा अध्यक्ष ने मैनपुरी की रैली में मुलायम को जन्मजात और असली पिछड़ा नेता बताया। जबकि नरेंद्र मोदी को फर्जी ओबीसी करार दिया। वहीं मुलायम ने अपने भाषण में मायावती की तारीफ की उन्होंने कहा, ‘मैं मैनपुरी के मतदाताओं की ओर से उनका अभिनंदन करता हूं। मैनपुरी की जनता से कहूंगा कि ताली पीटकर मायावती का स्‍वागत करें। मुझे खुशी है कि बहुत दिनों बाद बहन मायावती जी और मैं साथ आए। मायावती जी आई हैं, उनका स्वागत है। वह मेरे लिए वोट मांगने आई हैं। मैं उनका अहसान कभी नहीं भूलूंगा।’

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर चुनाव हो रहे है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 80 सीटों में से 71 सीटें जीती थी औऱ एनडीए ने 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी। तो वही 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए सपा-बसपा-आरएलडी ने गठबंधन किया है यानी बीजेपी का सीधा मुकाबला गठबंधन से है मतलब ये कि बीजेपी के लिए इस बार जीत दर्ज करना इतना आसान नहीं होगा। 26 साल बाद ये वक्त आया है जब सपा-बसपा के मंच पर आये है।

मैनपुरी के क्रिश्चियन कॉलेज के मैदान ने आज 1995 के बाद एक बार फिर अपनी सियासी कहानी दोहराई। 24 साल के लंबे अंतराल के बाद गठबंधन की छांव में मुलायम सिंह यादव बसपा प्रमुख मायावती के साथ मंच साझा किया। जहां बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने दशकों पुराने प्रतिद्वंद्वी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव  के लिये वोट मांगे।

1993 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद बसपा और भाजपा के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं। सपा को अंदेशा हो गया था कि बसपा कभी भी सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। ऐसे में 2 जून 1995 को मायावती अपने विधायकों के साथ स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थीं। इसकी जानकारी जब सपा के लोगों को हुई तो उसके कई समर्थक वहां पहुंच गए। सपा समर्थकों ने वहां जमकर हंगामा किया। बसपा विधायकों से मारपीट तक की गई।

मायावती ने इस पूरे ड्रामे को अपनी हत्या की साजिश बताया और मुलायम सरकार से समर्थन वापस ले लिया। भाजपा ने बसपा को समर्थन देने का पत्र राज्यपाल को सौंप दिया। अगले ही दिन मायावती राज्य की पहली दलित मुख्यमंत्री बन गईं थी। साल 1995 की गर्मियां दोनों दलों के रिश्ते ख़त्म करने का वक़्त लाईं। इसमें मुख्य किरदार गेस्ट हाउस है। इस दिन जो घटा उसकी वजह से बसपा ने सरकार से हाथ खींच लिए और वो अल्पमत में आ गई थी।

दरअसल सपा और बसपा ने 256 और 164 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा अपने खाते में से 109 सीटें जीतने में कामयाब रही थी जबकि 67 सीटों पर हाथी का दांव चला। लेकिन दोनों की ये रिश्तेदारी ज़्यादा दिन नहीं चली पाई। खैर चुनाव चल रहे है जनता सब देख रही है और ये भी देखना होगा की जनता को ये गठबंधन का साथ पसंद आता है या नहीं।

 

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